दुनिया तेज़ी से बदल रही है। कल जो सच था, आज वो इतिहास बन चुका है। अगर आप आज के दौर में world news in hindi ढूंढ रहे हैं, तो इसका मतलब है कि आप सिर्फ हेडलाइंस नहीं, बल्कि उन खबरों के पीछे की असली कहानी समझना चाहते हैं। सच कहूं तो, जनवरी 2026 की शुरुआत ने ही बता दिया है कि यह साल शांति वाला तो बिल्कुल नहीं होने वाला।
ईरान की गलियों में गूंजती आवाजों से लेकर दक्षिण अमेरिका के जंगलों तक, हर जगह कुछ न कुछ बड़ा पक रहा है। क्या आपने सोचा है कि सात समंदर पार हो रही एक हलचल आपकी जेब या आपकी सुरक्षा पर क्या असर डाल सकती है? शायद बहुत ज्यादा।
ईरान का संकट: क्या ये किसी बड़े युद्ध की आहट है?
ईरान में इस वक्त जो हो रहा है, वो सिर्फ एक विरोध प्रदर्शन नहीं है। तेहरान की सड़कों पर लोग उतर आए हैं और रिपोर्ट्स बताती हैं कि अब तक 2,500 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। यह आंकड़ा डराने वाला है। 17 जनवरी 2026 को दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर जब ईरानी उड़ानों से भारतीय छात्र और नागरिक उतरे, तो उनके चेहरों पर खौफ साफ दिख रहा था।
मेहजबीन काजमी जैसी भारतीय नागरिक, जो अभी-अभी तेहरान से लौटी हैं, बताती हैं कि वहां इंटरनेट पूरी तरह बंद है। लोग डरे हुए हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई को सीधे तौर पर इन मौतों का जिम्मेदार ठहराया है। इधर खामेनेई ने ट्रंप को 'अपराधी' घोषित कर दिया है।
भारत के लिए ये क्यों जरूरी है?
ईरान में अस्थिरता का मतलब है भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर खतरा। लेकिन एक दिलचस्प खबर ये है कि भारत ने साफ कर दिया है कि वो चाबहार बंदरगाह (Chabahar Port) नहीं छोड़ेगा। चाहे स्थिति कितनी भी तनावपूर्ण क्यों न हो, रणनीतिक रूप से यह बंदरगाह हमारे लिए अफगानिस्तान और मध्य एशिया का रास्ता है।
ग्रीनलैंड और ट्रंप का 'टैरिफ अटैक'
डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दुनिया को चौंका दिया है। उन्होंने घोषणा की है कि 1 फरवरी 2026 से डेनमार्क समेत आठ यूरोपीय देशों पर 10% का टैरिफ लगाया जाएगा। वजह? ग्रीनलैंड। ट्रंप का मानना है कि ग्रीनलैंड की सुरक्षा अमेरिका के लिए अहम है और वो इसे एक तरह से अमेरिकी प्रभाव में देखना चाहते हैं।
डेनमार्क की प्रधानमंत्री पहले ही इस पर कड़ी नाराजगी जता चुकी हैं। यूरोपीय संघ (EU) ने इस पर चर्चा के लिए इमरजेंसी बैठक बुलाई है। अगर ये टैरिफ लागू होते हैं, तो वैश्विक व्यापार में एक नया 'ट्रेड वॉर' शुरू हो सकता है।
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कमाल की बात देखिए, एक तरफ ट्रंप यूरोप पर दबाव बना रहे हैं, तो दूसरी तरफ उन्होंने वेनेजुएला के साथ एक बड़ी डील की है। अमेरिका वेनेजुएला से 5 करोड़ बैरल तेल खरीदेगा, और पैसा भी अमेरिकी खातों में ही जमा होगा। यह पूरी तरह से 'बिजनेस फर्स्ट' वाली कूटनीति है।
दक्षिण अमेरिका और यूरोप की नई दोस्ती: दुनिया का सबसे बड़ा फ्री ट्रेड ज़ोन
जब दुनिया के कुछ देश दीवारें खड़ी कर रहे हैं, तब 17 जनवरी 2026 को पराग्वे की राजधानी असुनसियन में इतिहास रचा गया। यूरोपीय संघ (EU) और मर्कोसुर (Mercosur) देशों—अर्जेंटीना, ब्राजील, पराग्वे और उरुग्वे—ने एक ऐतिहासिक व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।
यह समझौता दुनिया का सबसे बड़ा फ्री ट्रेड ज़ोन बनाता है। यह करीब 700 मिलियन लोगों और वैश्विक जीडीपी के 20% हिस्से को कवर करता है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसे 'संरक्षणवाद के खिलाफ एक जीत' बताया है।
world news in hindi में इस खबर का महत्व इसलिए है क्योंकि:
- इससे भारतीय निर्यातकों के लिए नए अवसर और चुनौतियां दोनों पैदा होंगी।
- 91% सामानों पर टैरिफ खत्म होने से वैश्विक सप्लाई चेन में बड़ा बदलाव आएगा।
- यह चीन के बढ़ते प्रभाव को कम करने की एक यूरोपीय कोशिश भी है।
हमारे पड़ोस में क्या चल रहा है?
पड़ोसी देशों की बात करें तो बांग्लादेश से आ रही खबरें चिंताजनक हैं। वहां चुनाव से पहले अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं के खिलाफ हिंसा की खबरें रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। 17 जनवरी को ही एक हिंदू दुकानदार की हत्या की खबर आई। ब्रिटिश सांसदों ने भी इस पर चिंता जताई है और मोहम्मद यूनुस की सरकार से बात करने की मांग की है।
वहीं पाकिस्तान में एक अलग ही तमाशा चल रहा है। करीब 159 सांसदों और विधायकों को इसलिए सस्पेंड कर दिया गया क्योंकि उन्होंने अपनी संपत्ति का हिसाब नहीं दिया था। वहां कोहरे के कारण हुए सड़क हादसों में 14 लोगों की मौत की खबर भी है।
इराक से भी एक बड़ी अपडेट है। अमेरिकी सेना पूरी तरह से ऐन अल-असद एयरबेस से हट गई है। अब वहां का पूरा नियंत्रण इराकी सेना के पास है। यह मिडिल ईस्ट की राजनीति में एक बड़ा मोड़ हो सकता है।
तकनीकी और पर्यावरण: भविष्य की आहट
सिर्फ राजनीति ही नहीं, प्रकृति भी अपना रंग दिखा रही है। फिलीपींस में 'नोकेन' (Nockan) नाम का तूफान तबाही मचाने को तैयार है। वैज्ञानिकों का कहना है कि 2026 में जलवायु परिवर्तन के कारण ऐसे तूफानों की तीव्रता बढ़ गई है।
भारत के संदर्भ में देखें तो डेलॉयट (Deloitte) ने भविष्यवाणी की है कि 2026 में भारतीय अर्थव्यवस्था 7.5% से 7.8% की दर से बढ़ेगी। यह दुनिया की सबसे तेज़ रफ्तार वाली बड़ी अर्थव्यवस्था बनी रहेगी। लेकिन चुनौतियां कम नहीं हैं। सड़क हादसों में भारत में हर साल करीब 3.5 लाख लोग जान गंवा रहे हैं, जो एक साइलेंट महामारी जैसा है।
आपको क्या करना चाहिए? (Actionable Steps)
दुनिया की इन हलचलों के बीच खुद को अपडेट रखना अब कोई विकल्प नहीं, बल्कि ज़रूरत है। यहाँ कुछ व्यावहारिक कदम दिए गए हैं:
- निवेश पर नज़र रखें: अगर आप शेयर मार्केट या कमोडिटी में निवेश करते हैं, तो ईरान और वेनेजुएला की तेल राजनीति पर पैनी नज़र रखें। क्रूड ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव सीधे आपकी बचत को प्रभावित करेगा।
- विश्वसनीय स्रोतों का चुनाव: सोशल मीडिया पर फैल रही फेक न्यूज़ से बचें। DD News, The Hindu और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर Reuters जैसे स्रोतों को प्राथमिकता दें।
- व्यापारिक समझ: अगर आप एक्सपोर्ट-इंपोर्ट के बिजनेस में हैं, तो EU-Mercosur डील की बारीकियों को समझें। ये नए मार्केट खोल सकता है।
- सुरक्षा का ध्यान: यदि आपके कोई सगे-संबंधी मिडिल ईस्ट या ईरान में हैं, तो दूतावास (Embassy) की एडवाइजरी का पालन करने को कहें।
world news in hindi की ये परतें हमें बताती हैं कि दुनिया अब एक गांव की तरह है। पराग्वे में हुआ कोई दस्तखत या तेहरान की कोई चीख, देर-सबेर हम तक पहुंचती ही है। सजग रहें, क्योंकि जानकारी ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।